Register Now

By registering, you agree to the Terms of Service and Privacy Policy.

Login

Forget

Lost Password

Lost your password? Please enter your email address. You will receive a link and will create a new password via email.

x

Login

Forget

Register Now

For New User Register & Ask Question Easily.

Create an account
x
  • Login Area
Ask a Question
0
  • Belief
  • Quraan
  • Fiqh
  • Hadith
  • Others
  • Books
  • Courses
  • Student Registration
  • Dashboard

Login

Forget

Register Now

For New User Register & Ask Question Easily.

Create an account
  • Login Area
0
Learn Islam Learn Islam
  • Belief
  • Quraan
  • Fiqh
  • Hadith
  • Others
  • Books
  • Courses
  • Student Registration
  • Dashboard

आख़िरत का दिन

Home/ हिन्दी/अन्य/आख़िरत का दिन

आख़िरत का दिन

Question
image_pdfPDF Downloadimage_printPDF Print

आख़िरत का दिन

﷽

ईमान के 6 अरकान में से एक आखिरत के दिन पर ईमान लाना है। कोई इंसान उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि वह आखिरत (परलोक) और उससे संबंधित चीजों और वहां पेश आने वाले मामलों पर ईमान न ले आए।

आखिरत के दिन के बारे में जानकारी हासिल करना और उसको कसरत से याद करना बहुत ही अहम है। क्योंकि मानवीय स्वभाव में सुधार, तक्वा और दीन पर जमे रहने के लिए इसकी महत्वपूर्ण भुमिका है। दिल तभी कठोर होता है और गुनाहों की हिम्मत करता है जबकि हम उस दिन को भूल बैठते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है:

فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِنْ كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ الوِلْدَانَ شِيئًا ﴾ [المزمل: ١٧]
यानी, “तुम यदि काफिर रहे, तो उस दिन कैसे पनाह पाओगे जिस दिन बच्चों को बूढ़ा कर देगा। [सूरह मुजम्मिल, आयत 17]
और फरमायाः

يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ إِنَّ زَلْزَلَةَ السَّاعَةِ شَيْءٌ عَظِيمٌ يَوْمَ تَرَوْنَهَا تَذْهَلُ كُلُّ مُرْضِعَةٍ عَمَّا أَرْضَعَتْ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمْلٍ حَمْلَهَا وَتَرَى النَّاسَ سُكَارَى وَمَا هُمْ بِسُكَارَى وَلَكِنَّ عَذَابَ اللَّهِ شَدِيدٌ﴾ [الحج: ٣:٢]
“लोगो, अपने पालनहार से डरो ! निस्संदेह कियामत का जलजला बहुत ही बड़ी चीज़ है। जिस दिन तुम उसे देख लोगे कि हर दूध पिलाने वाली दूध पीते बच्चे को भूल जायेगी और सभी गर्भवती महिलाओं के गर्भ गिर जायेंगे। और तू देखेगा कि लोग मदहोश दिखायी देंगे, यद्यपि वास्तव में वे मतवाले नहीं होंगे। लेकिन अल्लाह का अजाब बड़ा ही सख्त है।

मौत

इस दूनिया में हर ज़िन्दा चीज़ एक दिन समाप्त हो जाती है। इसी समाप्ति का नाम मौत है। अल्लाह तआला फरमाता है:

كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ [آل عمران : ١٨٥]
यानी, “हर नफ़्स को मौत का मजा चखना है। (सूरह आले इमरान आयत 185)

[كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ [الرحمن : ٢٦
यानी, “जमीन पर जो हैं सब फना होने वाली हैं। [सूरह अलरहमान आयत 26]

अल्लाह तआला ने अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सम्बोधित करते हुए फरमाया :
إِنَّكَ مَيِّتٌ وَإِنَّهُمْ مَيِّتُونَ [الزمر : ۳۰]

यानी, “यकीनन आपको भी मौत आयेगी और यह सब भी मरने वाले हैं। इस दुनिया में कोई भी हमेशा के लिए ज़िन्दा नहीं रहेगा। (सूरह अल-जुम्र आयत-30 31)

अल्लाह तआला ने इसी सच्चाई को बयान करते हुए कहाः

وَمَا جَعَلْنَا لِبَشَرٍ مِنْ قَبْلِكَ الْخُلْدَ أَفَإِنْ مِتَّ فَهُمُ الْخَالِدُونَ [الأنبياء : ٣٤]
यानी, “आप से पहले किसी इंसान को भी हमने हमेशगी नहीं दी। (सूरह अल अंबिया आयत 34)

1. अधिकांष लोग मौत से गफलत बरतते हैं, हालांकि मौत एक अकाट्य सत्य है जिस में किसी सन्देह की गुंजाइश नहीं है। मुसलमान के लिए जरूरी है कि वह अधिक से अधिक मौत को याद करे। और समय बीतने से पहले अपनी इस दुनिया में नेकी के जरिया अपनी आखिरत (परलोक) का सामान तैयार कर ले।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमाया है

اغْتَنِمْ خَمْسًا قَبْلَ خَمْسٍ : حَيَاتَكَ قَبْلَ مَوْتِكَ ، وَفَرَاغَكَ قَبْلَ
شَغْلِكَ ، وَغِنَاكَ قَبْلَ فَقْرِكَ ، وَشَبَابَكَ قَبْلَ هَرَمِكَ ، وَصِحَّتَكَ قَبْلَ سَقَمِكَ

पांच चीजों को पांच चीजों से पहले गनीमत जानो। अपनी ज़िन्दगी को मौत से पहले, अपनी सेहत को बीमारी से पहले, फुर्सत को व्यस्तता से पहले, जवानी को बुढ़ापे से पहले और सम्पन्नता को तंगहाली से पहले। [इसे इमाम अहमद ने रिवायत किया है।]
मुर्दा अपने साथ कब्र में दुनिया का साजो सामान नहीं ले जाता है। बल्कि उसके साथ उसका अमल रहता है। अतः आदमी को चाहिए कि वह ज्यादा से ज्यादा नेक अमल करे ताकि हमेशा की सआदत हासिल कर सके और उसके कारण अज़ाब से छुटकारा पा सके।

2. मौत कब आयेगी इसका पता नहीं चलता। इसका पता अल्लाह के सिवा किसी को भी नहीं होता। कोई आदमी न तो यह जानता है कि उसकी मृत्यु कब होगी, क्योंकि ये गैबी चीजें है जिसे केवल अल्लाह ही जानता है।

3. जब मौत आएगी तो उसे दूर करना, समय को टाल देना, या मौत से भाग जाना संभव नहीं है।

अल्लाह तआला फरमाता है: यानी,
وَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ فَإِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ﴾ [الأعراف: ٣٤]
और हरेक गिरोह के लिए एक अवधि सुनिष्चित है, सो जिस समय उनकी अवधि पूरी हो जायेगी, उस समय एक घड़ी न पीछे हट सकेगी और न आगे बढ़ सकेगी। [सूरह अल आराफ आयत 34]

4 मोमिन को जब मौत आती है तो उसके पास मलकुल मौत अच्छी शक्ल व सूरत और अच्छी सुगन्ध के साथ आते हैं और मलकुल मौत यानी मौत के फ़रिषते के साथ रहमत के फरिषते भी आते हैं जो उसे जन्नत की शुभसूचना सुनाते हैं। अल्लाह तआला फ्रमाता है:

إِنَّ الَّذِينَ قَالُوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلَائِكَةُ أَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ [فصلت: ٣٠]
यानी, “वास्तव में जिन लोगों ने कहा कि हमारा पालनहार अल्लाह है और फिर उसी पर जमे रहे उनके पास फरिषते यह कहते हुए आते हैं कि तुम कुछ भी आशंका और ग़म न करो बल्कि उस जन्नत की शुभसूचना सुन लो जिसका तुमसे वादा किया गया है। [सूरह फुस्सिलत आयत 30]

अलबत्ता काफिर इंसान के पास मौत का फरिष्ता डरावनी शक्ल, काली कलौटी सूरत और विभत्सय रूप में आता है और उसके साथ अजाब के फरिषते भी आते हैं और अज़ाब की सूचना देते हैं।
अल्लाह तआला फ्रमाता हैः

وَلَوْ تَرَى إِذِ الظَّالِمُونَ فِي غَمَرَاتِ الْمَوْتِ وَالْمَلَائِكَةُ بَاسِطُو أَيْدِيهِمْ أَخْرِجُوا أَنْفُسَكُمُ اليَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ غَيْرَ الْحَقِّ وَكُنْتُمْ عَنْ آيَاتِهِ تَسْتَكْبِرُونَ﴾ [الأنعام: ٩٣]

यानी, “और यदि आप उस समय देखें जबकि ये जालिम लोग मौत की सख्तियों में होंगे और फरिषते अपने हाथ बढ़ा रहे होगें कि हां, अपनी जानें निकालो। आज तुमको जिल्लत की सजा दी जायेगी। इस वजह से कि तुम अल्लाह तआला के जिम्मे झूठी बातें लगाते थे और तुम अल्लाह तआला की आयतों से तकब्बुर (घमंड) करते थे। ( सुरह अनआम 93)
जब मौत आती है तो सच्चाई ज़ाहिर हो जाती है। और हर इंसान का मामला खुल जाता है।
अल्लाह तआला फरमाता है:

حَتَّى إِذَا جَاءَ أَحَدَهُمُ الْمَوْتُ قَالَ رَبِّ ارْجِعُونِ لَعَلِّي أَعْمَلُ صَالِحًا فِيمَا تَرَكْتُ كَلَّا إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَائِلُهَا وَمِنْ وَرَائِهِمْ بَرْزَخٌ إِلَى يَوْمِ يُبْعَثُونَ ﴾   [المؤمنون: ١٠٠]

यानी, “यहां तक कि जब उनमें से किसी को मौत आ जाती है तो कहता है, ऐ मेरे पालनहार ! मुझे वापस लौटा दे कि अपनी छोड़ी हुई दुनिया में जाकर नेक आमाल कर लूं, कदापि ऐसा नहीं होगा। यह तो केवल एक कथन है जिसका यह कायल है। उनके पीठ पीछे तो एक पर्दा है, उनके दोबारा जी उठने के दिन तक। [सूरह अल मोमिनून आयत 99-100]

जब मौत आती है तो काफिर और गुनहगार इंसान दुनियावी ज़िन्दगी में वापस जाना चाहता है ताकि वह नेक काम कर सके, लेकिन समय निकल जाने के बाद निदामत किसी काम की न होगी। अल्लाह तआला फरमाता है:
وَتَرَى الظَّالِمِينَ لَمَّا رَأَوُا العَذَابَ يَقُولُونَ هَلْ إِلَى مَرَةٌ مِنْ سَبِيلٍ ﴾ [الشورى: ٤٤]
यानी, “जालिम लोग अजाब को देखकर कह रहे होंगे कि क्या वापस जाने की कोई राह है। [सूरह अल शूरा आयत 44]

5 अल्लाह तआला का अपने बन्दों पर बडा रहम व करम है कि मौत से पहले जिस इंसान की अंतिम बोली, “ला इलाहा इल्लल्लाह होगी तो वह जन्नत में दाखिल होगा।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है:

مَنْ كَانَ آخِرُ كَلَامِهِ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ دَخَلَ الْجَنَّةَ
दुनिया में जिस इंसान का आखिरी कलाम “ला इलाहा इल्लल्लाह होगा वह जन्नत में दाखिल होगा। [इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।]

इसका कारण यह है कि इस कठिन समय में एक इंसान इख्लास से ही इस कलिमा को कहेगा। अलबत्ता जो मुख्लिस नहीं होगा, वह मौत की परेशानियों की शिद्दत की वजह से भूल जायेगा। इसी लिए मृत हालत में पड़े व्यक्ति के पास मौजूद लोगों के लिए सुन्नत है कि वह उसे ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ने को प्रेरित करे।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है:
لَقَنُوا مَوْتَاكُمْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ
अपने मुर्दों को “लाइलाह इल्लल्लाह दोहराने की तलकीन किया करो। [सही मुस्लिम 916]

अलबत्ता इसका आग्रह न करें, ताकि वह उकता कर कोई अनुचित बात जुबान से अदा न कर दे।

कब्र

अनस रजियल्लाहु अन्हु से उल्लिखित है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमायाः

العَبْدُ إِذَا وُضِعَ فِي قَبْرِهِ، وَتُولَّيَ وَذَهَبَ أَصْحَابُهُ حَتَّى إِنَّهُ لَيَسْمَعُ قَرْعَ نِعَالِهِمْ، أَتَاهُ مَلَكَانِ، فَأَقْعَدَاهُ، فَيَقُولَانِ لَهُ : مَا كُنْتَ تَقُولُ فِي هَذَا الرَّجُلِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ؟ فَيَقُولُ : أَشْهَدُ أَنَّهُ عَبْدُ اللَّهَ وَرَسُولُهُ، فَيُقَالُ: انْظُرْ إِلَى مَقْعَدِكَ مِنَ النَّارِ أَبْدَلَكَ اللَّهُ بِهِ مَقْعَدًا مِنَ الْجَنَّةِ ، قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: ” فَيَرَاهُمَا جَمِيعًا، وَأَمَّا الكَافِرُ – أَوِ الْمُنَافِقُ – فَيَقُولُ : لَا أَدْرِي، كُنْتُ أَقُولُ مَا يَقُولُ
النَّاسُ، فَيُقَالُ: لاَ دَرَيْتَ وَلَا تَلَيْتَ ، ثُمَّ يُضْرَبُ بِمِطْرَقَةٍ مِنْ حَدِيدٍ ضَرْبَةً بَيْنَ أُذُنَيْهِ، فَيَصِيحُ صَيْحَةً يَسْمَعُهَا مَنْ يَلِيهِ إِلَّا الثَّقَلَيْنِ

मैय्यत को जब कब्र में रखा जाता है और उसके साथी वापस होते हैं तो वह उनकी जूतियों की आवाज़ सुनता है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आगे फरमायाः फिर उसके बाद दो फरिषते आते हैं और उसे बिठाते हैं और उससे कहते हैं तुम उस आदमी के बारे में क्या कहते थे?
यदि वह व्यक्ति मोमिन होगा तो कहेगाः मैं गवाही देता हूं कि वह अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं। फिर उससे कहा जाता है कि जहन्नम में अपनी जगह देख लो, जिसे अल्लाह ने जन्नत की जगह से बदल दिया है।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आगे फरमायाः “वह व्यक्ति दोनों जगहों को देखेगा। यदि मरने वाला व्यक्ति काफि या मुनाफिक हो तो इस सवाल के जवाब में कहेगाः मुझे नहीं मालूम, मैं लोगों से सुनता था कि वह कुछ कहा करते थे, वही मैं भी कहा करता था।
तो उससे कहा जाता है कि न तो तुम्हें मालूम हुआ और न ही तुमने उसे जानने की कोशिश की। उसके बाद उस व्यक्ति के कानों के बीच लोहे की हथौडी से मारा जाता है, जिसकी वजह से वह इतनी जोर से चीखता है कि इंसान और जिन्नात के सिवा उसके पास मौजूद सारी मखलूकात इस चीख को सुनती हैं। [सही बुखारी 1338, सही मुस्लिम 2870]

कब्र में रूह का शरीर में वापस आना आखिरत के मामलों में से एक है जिसका सांसारिक जीवन में इंसानी अक्ल व शुऊर अंदाज़ा नहीं लगा सकती। तमाम मुसलमान इस बात पर सहमत हैं कि यदि इंसान मोमिन हो और नेमतों का मुस्तहिक हो तो उसको कब्र ही में नेमतों से नवाज़ा जाता है और यदि अज़ाब का अधिकारी है तो कब्र में ही अजाब से दो-चार हो जाता है। यदि अल्लाह तआला ने उसे माफ किया है। अतएव अल्लाह तआला ने फरमाया है:

النَّارُ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا غُدُوًّا وَعَشِيًّا وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ أَدْخِلُوا آلَ فِرْعَوْنَ أَشَدَّ العَذَابِ ﴾ [غافر : ٤٦]
यानी, “आग है जिसके सामने यह हर सुबह व शाम लाये जाते हैं और जिस दिन कियामत कायम होगी, फरमान होगा कि फिरऔनियों को सख्ततरीन अज़ाब में डालो। [सूरह अल गाफिर आयत 46]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इशीद फरमाया है: “तुम लोग कब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह मांगो। सही अक्ल इन चीजों का इन्कार नहीं कर सकती है क्योंकि इंसान दुनियावी जिन्दगी में इससे करीबतर चीजों का तजरबा करता है। जैसा कि सोने वाला इंसान महसूस करता है कि उसे सख्त अज़ाब दिया जा रहा है। वह चिल्लाता है, चीखता है, और मदद चाहता है। जबकि उसके बगल में दुसरा इंसान इस तरह की किसी भी चीज़ों को महसूस नहीं कर रहा होता है। जबकि मौत और ज़िन्दगी में बहुत बड़ा अन्तर है। कब्र में अज़ाब शरीर और आत्मा दोनों को होता है।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमायाः
“कब्र आखिरत की मन्जिलों में से पहली मन्जिल है। यदि इंसान इसमें निजात पा जाए तो उसके बाद की मन्ज़िलें आसान हो जायेंगी। लेकिन यदि इंसान इसमें निजात नहीं पा सकेगा तो बाद की मन्ज़िलें उससे सख्त होंगी
यही कारण है कि एक मुसलमान को कब्र के अज़ाब से कसरत से पनाह मांगने की शिक्षा दी गयी है। विशेष कर नमाज़ में सलाम फेरने से पहले। और बुराइयों से दूर रहे जो कब्र और जहन्नम में अजाब से दो चार होने का पहला कारण है। इस अज़ाब को अज़ाबे कब्र कहा जाता है, इस वजह से कि अक्सर लोगों को कब्र में दफ्न कर दिया जाता है, अन्यथा डूब कर या जल कर मरने वाले को, या उस व्यक्ति को जिसे दरिंदों ने खा लिया हो, उनको भी बरजख में अज़ाब दिया जाता है।
अजाबे कब्र में लोहे के हथौड़े से मारा जाता है और उसके सिवा दूसरी तरह से भी अज़ाब दिया जाता है। मिसाल के तौर पर कब्र को तारीकी से भर दिया जाता है। या जहन्नम को आग का बिछौना कर दिया जाता है और उसके लिए जहन्नम का दरवाज़ा खोल दिया जाता है।
और उसके अमल को बदसूरत, बदबूदार इंसान की शक्ल व सूरत दे दी जाती है जो उसके साथ कब्र में बैठता है। यदि इंसान काफि या मुनाफिक हो तो वह इस अज़ाब में बराबर मुबतला रहेगा। लेकिन यदि इंसान मोमिन हो जिससे गुनाह सरज़द हुए हों, तो उसके गुनाह के अनुसार उसका अजाब अलग-अलग होगा। और उसका अजाब समाप्त भी हो जाता है।
जहां तक मामला मोमिन का है तो कब्र में उसे नेमतों से नवाजा जाता है, उसके कब्र को कुशादा कर दिया जाता है, कब्र को नूर से भर दिया जाता है और उसके लिए जन्नत का एक दरवाज़ा खोल दिया जाता है। जिससे जन्नत की खुशबू और सुगंध आती है और उसके लिए जन्नत का बिछौना कर दिया जाता है और उसके अमल को एक खूबसूरत इंसान की सूरत दे दी जाती है, जिससे वह कब्र में उनसियत हासिल करता है। क़यामत और उसकी निशानियां

1. अल्लाह ने इस सृष्टि को हमेशा बाकी रहने के लिए पैदा नहीं किया है, बल्कि एक दिन ऐसा आएगा जबकि यह सृष्टि (कायनात) समाप्त हो जायेगी। यही वह दिन होगा जिसमें कियामत बरपा होगी। कियामत का बरपा होना एक ऐसी सच्चाई है जिसमें संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है। अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है:

وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَا تَأْتِينَا السَّاعَةُ قُلْ بَلَى وَرَبِّي لَتَأْتِيَنَّكُمْ عَالِمِ الْغَيْبِ لَا يَعْزُبُ عَنْهُ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ وَلَا أَصْغَرُ مِنْ ذَلِكَ وَلَا أَكْبَرُ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُبِينٍ ﴾ [سبأ:٣]

कुफ्फार कहते हैं कि हम पर कियामत नहीं आयेगी, आप कह दीजिए कि मुझे मेरे रब की कसम ! वह यकीनन तुम पर आयेगी। [सूरह सबा आयत 3]
क़ियामत करीब है, क्योंकि अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है:

اقْتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمْ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ مُعْرِضُونَ ﴾ [الأنبياء : ١]
यानी, “लोगों के हिसाब का समय करीब आ गया, फिर भी वह बेख़बरी में मुंह फेरे हुए हैं।[सूरह अल अंबिया आयत 1]

क़ियामत का करीब आना इंसानों के अनुमान के एतिबार से नहीं है बल्कि वह अल्लाह के ज्ञान और दुनिया की आयु के हिसाब से है। कियामत का ज्ञान गैबी मामलों में से है। अल्लाह तआला ने अपने लिए खास रखा है और अपनी मखलूकों में से किसी को इससे अवगत नहीं कराया।
अल्लाह तआला फरमाता है:

يَسْأَلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِنْدَ اللَّهِ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا ﴾ [الأحزاب: ٦٣]
यानी, “लोग आप से कियामत के बारे में सवाल करते हैं। आप कह दीजिए कि उसका ज्ञान तो अल्लाह ही को है। आप को क्या ख़बर बहुत मुम्किन है कि कियामत बिल्कुल ही करीब हो। [सूरह अल अहजाब आयत 63]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुछ निशानियां बतायी हैं जो कियामत के करीब होने का संकेत हैं। उनमें से एक मसीह दज्जाल का जाहिर होना है जो कि लोगों के लिए बहुत बड़ा फित्ना होगा। अल्लाह तआला उसे बहुत से ऐसे कामों को करने का सामर्थ्य प्रदान करेगा जो प्राकृतिक नियमों के खिलाफ होंगे। जिससे लोग धोखे में पड जायेंगे। वह आसमान को आदेश देगा कि बारिश कर और वर्षा होने लगेगी। घास को आदेश देगा तो वह निकल आयेगी। मुर्दा को ज़िन्दा करेगा और उसके अलावा बहुत से अस्वभाविक काम करेगा।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बताया है कि वह काना है और वह जन्नत और जहन्नम जैसी चीज़ लेकर आयेगा। वह जिसे जन्नत कहेगा वह जहन्नम होगी और जिसे जहन्नम कहेगा वह जन्नत होगी। वह चालीस दिन जमीन पर रहेगा, एक दिन एक साल के बराबर होगा। एक दिन एक महीने के बराबर होगा और एक दिन एक सप्ताह के बराबर होगा और शेष दिन आम दिनों जैसे होंगे और वह मक्का व मदीना छोड़कर दुनिया के तमाम हिस्सों में जायेगा।
कियामत की निशानियों में से ईसा अलैहिस्सलाम का अवतरित होना भी है। आप दिमश्क के पूरब में सफेद मिनारे पर सुबह के समय उतरेंगे जहां लोगों के साथ नमाज अदा करेंगे और फिर दज्जाल का पीछा करेंगे और उसे पकड कर मार डालेंगे। कियामत की निशानियों में एक निशानी सूरज का पश्चिम की तरफ से निकलना है। जब लोग इसे देखेंगे तो डर जायेंगे और ईमान कुबूल कर लेंगे। यद्यपि उस समय ईमान कुबूल करना लाभदायक सिद्ध नहीं होगा। इसके अलावा कियामत की दूसरी निशानियां भी हैं।

कियामत बुरे लोगों पर बरपा होगी। उसकी कैफियत यह होगी कि अल्लाह तआला कियामत से पहले पाकीजा हवा भेजेगा जो मोमिनों की रूहों को कब्ज कर लेगी। जब अल्लाह तआला मखलूकात को मौत से दो चार और दुनिया को समाप्त करना चाहेगा तो फरिषतों को सूर (बड़ा शेंपू) फूंकने का आदेश देगा जिसे सूनकर लोग बेहोश हो जायेंगे।
अल्लाह तआला इशीद फरमाता है:

وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَصَعِقَ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَمَنْ فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَنْ شَاءَ اللَّهُ [الزمر : ٦٨]
यानी, “और सूर फूंक दिया जायेगा। पस आसमानों और जमीन वाले सब बेहोश होकर गिर पड़ेंगे मगर जिसे अल्लाह चाहे। [सूरह अल जुमर आयत 68]

जिस दिन कियामत बरपा होगी वह जुमा का दिन होगा। उसके बाद सभी फरिषतों को मौत आ जायेगी और केवल अल्लाह की जात बाकी रह जायेगी। पीठ के नीचे की हड्डी के सिवा पूरा मानवीय अस्तित्व समाप्त हो जायेगा और उसे मिट्टी खा जायेगी। अलबत्ता नबियों के शरीर को मिट्टी नहीं खाती है। फिर अल्लाह तआला आसमान से पानी बरसायेगा, जिस से इंसान के शरीर दोबारा उग आयेंगे। जब अल्लाह लोगों को दोबारा जिन्दा करना चाहेगा तो सूर फूंकने के ज़िम्मेदार फरिश्ते इसराफील अलैहिस्सलाम को पहले ज़िन्दा करेगा। अतएव वे दूसरी बार सूर फुकेंगे तो अल्लाह तआला तमाम मखलूक को जिन्दा कर देगा और लोग अपनी कब्रों से उसी तरह नंगे पांव नंगे शरीर और नंगे मादरजाद अवस्था में निकलेंगे जिस तरह से अल्लाह तआला ने उन्हें पहली बार पैदा किया था।
अल्लाह तआला इर्शाद फरमाता है:

وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَإِذَا هُمْ مِنَ الْأَجْدَاثِ إِلَى رَبِّهِمْ يَنْسِلُونَ﴾ [يس: ٥١]
यानी, “और सूर फूंका जायेगा तो लोग अपनी कब्रों से निकल कर अपने रब की बारगाह की तरफ दौड़ पड़ेंगे।
[सूरह यासीन आयत 51]

एक दूसरी जगह अल्लाह तआला फरमाता है:

يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَى نُصُبٍ يُوفِضُونَ (٥٤) خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ذَلِكَ اليَوْمُ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ (٥٥ المعارج)
यानी, “जिस दिन ये कब्रों से दौड़ते हुए निकलेंगे, मानो कि वह किसी जगह की ओर दौड़ दौड़ कर जा रहे हैं। उनकी आंखें झुकी हुई होंगी। उनपर ज़िल्लत छा रही होगी। यह है वह दिन जिसका उनसे वादा किया जाता था। [सूरह अल मआरिज आयत 43-44]

उस दिन सबसे पहले कब्र से नबी अकरम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम निकलेंगे। उसके बाद लोगों को मैदाने महशर जो बहूत ही लंबा चौड़ा मैदान होगा, ले जाया जायेगा। काफिरों को औंधे मुंह जमा किया जायेगा।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा गयाः “काफिर को उसके चेहरे के बल किस तरह से जमा किया जायेगा? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)ने फरमायाः
أَلَيْسَ الَّذِي أَمْشَاهُ عَلَى الرِّجْلَيْنِ فِي الدُّنْيَا قَادِرًا عَلَى أَنْ يُمْشِيَهُ عَلَى وَجْهِهِ يَوْمَ القِيَامَةِ
जिस जात ने दुनिया में उसे पैरों पर चलाया क्या वह इस बात का सामर्थ्य नहीं रखता कि वह कियामत के दिन चेहरे के बल चलाए। [सही मुस्लिम 2806]

अल्लाह के जिक्र कुरआन पाक से बचने वालों को नाबीना अंधा बनाकर मैदान महशर में इकट्ठा किया जायेगा। सूरज उनके नज़दीक आ जायेगा। लोग अपने आमाल के अनुपात में पसीने में शराबोर होंगे। किसी के टखनों तक पसीना होगा, किसी की कमर तक पसीना होगा। किसी के मुंह तक पसीना होगा और ऐसा उनके आमाल के हिसाब से होगा।
वहां कुछ लोग ऐसे होंगे जिन्हें अल्लाह तआला अपने साये तले जगह देगा जिसके साये के सिवा कोई दूसरा साया नहीं होगा।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमायाः

سَبْعَةٌ يُظِلُّهُمُ اللَّهُ فِي ظِلَّهِ ، يَوْمَ لَا ظِلَّ إِلَّا ظِلُّهُ: الْإِمَامُ العَادِلُ، وَشَابٌ نَشَأَ فِي عِبَادَةِ رَبِّهِ ، وَرَجُلٌ قَلْبُهُ مُعَلَّقٌ فِي المَسَاجِدِ، وَرَجُلَانِ تَحَابَّهَا فِي اللَّهَ اجْتَمَعَا عَلَيْهِ وَتَفَرَّقَا عَلَيْهِ، وَرَجُلٌ طَلَبَتْهُ امْرَأَةٌ ذَاتُ مَنْصِبٍ وَجَمَالٍ، فَقَالَ : إِنِّي أَخَافُ اللهُ ، وَرَجُلٌ تَصَدَّقَ ، أَخْفَى حَتَّى لَا تَعْلَمَ شِمَالُهُ مَا تُنْفِقُ يَمِينُهُ، وَرَجُلٌ ذَكَرَ اللَّهَ خَالِيًا فَفَاضَتْ عَيْنَاهُ
सात तरह के लोग ऐसे होंगे जिन्हें अल्लाह तआला अपने साया तले उस दिन जगह देगा जिस दिन उसके साये के सिवा कोई दूसरा साया नहीं होगा। न्याय प्रिय बादशाह, नवजवान जिसका लालन पालन अल्लाह की इबादत में हुआ हो, वह आदमी जिसका दिल मस्जिदों में लटका रहता है, वे लोग जो अल्लाह की राह में दोस्ती करते हैं, उसी के लिए जमा होते हैं, उसी के लिए जुदा होते हैं। ऐसा व्यक्ति जिसे किसी सून्दर महिला ने बदकारी के लिए बुलाया हो, मगर उसने कह दिया हो कि मैं अल्लाह से डरता हूं। ऐसा व्यक्ति जिसने छुपाकर सदका किया हो, यहां तक कि उसके बायें हाथ को भी मालूम न हो कि उसके दाहिने हाथ ने क्या खर्च किया। और ऐसा व्यक्ति जो तनहाई में अल्लाह तआला को याद करता हो तो उसकी आँखें भर आती हों। [सही बुखारी 1423, सही मुस्लिम 1031]

यह केवल मर्दों के लिए खास नहीं है बल्कि महिलाओं के आमाल का भी हिसाब किताब होगा। यदि उसने बेहतर कर्म किया होगा तो उसके साथ बेहतरी का मामला होगा और यदि बुरा कर्म किया होगा तो उसके साथ बुरा मामला होगा। औरत को भी मर्द की तरह ही सवाब और बदला नसीब होगा।

उस दिन, जो पचास हज़ार साल के बराबर होगा, लोगों को शिद्दत के साथ प्यास महसूस होगी। अलबत्ता यह समय मोमिन के लिए एक फर्ज नमाज पढ़ने की अवधि के समान होगा, जो जल्द ही गुज़र जायेगी । मुसलमान नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हौज़ पर जायेंगे और उससे पानी पीयेंगे। (हौज़ एक बहुत बड़ी नेमत है जिसे अल्लाह खासतौर पर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अता करेगा। उसका पानी दूध से ज़्यादा सफेद, शहद से ज़्यादा मीठा, उसकी खुशबू मुष्क से ज़्यादा पाकीजा और उसमें मौजूद बर्तन सितारों की संख्या में होंगे। इससे जो एक बार पी लेगा, वह कभी प्यासा नहीं रहेगा।) लोग मैदाने महशर में लम्बे समय तक रहेंगे और अपने बीच फैसला किये जाने और हिसाब व किताब का इन्तिजार करेंगे और साथ ही धूप भी तेज़ होगी तो लोग ऐसे व्यक्ति की खोज में निकलेंगे जो मखलूकात के बीच फैसले के लिए सिफारिश कर सके। सभी लोग आदम अलैव के पास पहुंचेंगे, लेकिन वे असमर्थता व्यक्त कर देंगे। फिर नूह अलैहिस्सलाम के पास जायेंगे वह भी उज़ कर लेंगे। उसके बाद इबराहीम अलैव की सेवा में पहुंचेंगे, वे भी माज़रत कर लेंगे तो लोग मूसा अलैव के पास जायेंगे, लेकिन वह भी असमर्थता व्यक्त कर देंगे फिर लोग ईसा अलैहिस्सलाम की सेवा में पहुंचेंगे, मगर वे भी असमर्थता व्यक्त कर देंगे।
अतएव अन्त में सभी लोग नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सेवा में हाज़िर होंगे, तो आप कहेंगे कि मैं सिफारिश करूंगा और अर्श के नीचे सजदे में गिर जायेंगे। और रब की वह तारीफें बयान करेंगे जिन्हें अल्लाह इस अवसर पर आपको बतायेगा। उसके बाद आपसे कहा जायेगा,
‘ऐ मुहम्मद ! अपना सिर उठाओ, मांगो, दिया जायेगा और सिफारिश करो, तुम्हारी सिफारिश कुबूल की जायेगी फिर अल्लाह तआला लोगों के बीच फैसले और हिसाब-किताब की इजाज़त देगा और सबसे पहले मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत का हिसाब किताब होगा
बन्दों के आमाल में सबसे पहले नमाज का हिसाब लिया जायेगा। यदि वह ठीक होगी और स्वीकार कर ली जायेगी तो अन्य कर्मों को देखा जायेगा। और यदि नमाज रद्द कर दी गयी तो दूसरे आमाल भी रद्द कर दिये जायेंगे।
बन्दों से पांच चीजों के बारे में सवाल किया जायेगा। उसकी आयु के बारे में कि उसे उसने किस चीज़ में खर्च किया, उसकी जवानी के बारे में कि उसे कहां गुजारा, उसके माल के बारे में कि उसे कहां से कमाया और कहां खर्च किया और इल्म (ज्ञान) के बारे में कि कितना उस पर अमल किया।
अलबत्ता मामलात में बन्दों के बीच सबसे पहले खून का फैसला किया जायेगा। उस दिन नेकियों और बुराइयों के जरिया केसास दिया जायेगा। किसी व्यक्ति के नेकियों को लेकर उसके फ्रीक को दे दिया जायेगा और जब उसकी नेकियां खत्म हो जायेंगी तो उसकी बुराइयां उस व्यक्ति के खाते में डाल दी जायेंगी।
उस दिन पुल सिरात स्थापित किया जायेगा। सिरात एक पुल होगा जो बाल से अधिक पतला और तलवार से अधिक तेज होगा। उसे जहन्नम के ऊपर स्थापित किया जायेगा। जिन लोगों ने अच्छा अमल (कर्म) किया होगा वे पलक झपकते उस पुल से गुज़र जायेंगे, तो कुछ हवा की तरह गुज़रेगें, कुछ अच्छे किस्म के घोड़े की गति में पार कर जायेंगे तो कुछ लोग घिसटते हुए पुल सिरात को पार कर जायेंगे।
पुल सिरात पर आंकस लगे होंगे जो लोगों को उचक लेंगे और उन्हें जहन्नम में डाल देंगे। काफिरों और मोमिनों में से जिन गुनहगार बन्दों को अल्लाह चाहेगा, वे जहन्नम में गिर जायेंगे। काफिर तो हमेशा-हमेशा के लिए जहन्नम में रहेंगे, जबकि वह मोमिन जिन से कुछ गुनाह हो गया होगा, उन्हें अल्लाह जितना चाहेगा, अज़ाब देगा और फिर उन्हें जहन्नम से निकाल कर जन्नत में दाखिल कर देगा।
अल्लाह तआला रसूलों और नबियों में से जिन्हें चाहेगा, उन्हें अहले तौहीद में से जहन्नम में दाखिल हुए लोगों के हक़ में सिफारिश करने की अनुमति देगा। और उनकी सिफारिश से अल्लाह उन्हें जहन्नम की आग से निकालेगा।
पुल सिरात को पार करने वाले जन्नती लोग जन्नत और जहन्नम के बीच एक पुल पर रुकेंगे, जहां एक दूसरे का बदला दिलाया जायेगा। उनमें से जिसके जिम्मे उसके भाई का कोई हक होगा तो जब तक बदला नहीं दिला दिया जायेगा और हरेक का दिल दूसरे के प्रति ठीक न हो जायेगा वह जन्नत में दाखिल न होगा।
जब जन्नती जन्नत में और जहन्नमी जहन्नम में दाखिल हो जायेंगे तो मौत को एक मेंढ़े की शक्ल में लाया जायेगा और उसे जन्नत व जहन्नम के बीच जिब्रह कर दिया जायेगा। उसको जन्नती और जहन्नमी सभी लोग देख रहे होंगे उसके बाद कहा जायेगा कि जन्नतियो ! अब हमेशा जिन्दा रहना है, मौत नहीं आयेगी, जहन्नमियो ! अब हमेशा ज़िन्दा रहना है, मौत नहीं आयेगी। उस समय यदि खुशी से मरना संभव होता तो जन्नती मारे खुशी के मर जाते और गम से मरना संभव होता तो जहन्नमी गम से मर जाते ।

जहन्नम और उसके अज़ाब

अल्लाह ने फरमाया है:
فَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي وَقُودُهَا النَّاسُ وَالْحِجَارَةُ أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ [البقرة : ٢٤]
यानी “उस आग से बचो जिसका इंधन इंसान और पत्थर हैं जो काफिरों के लिए तैयार किया गया है। [सूरह अल बक्रा आयत 24]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सहाबियों को संबोधित करते हुए कहाः

نَارُكُمْ هَذِهِ الَّتِي يُوقِدُ ابْنُ آدَمَ جُزْءٌ مِنْ سَبْعِينَ جُزْءًا، مِنْ حَرِّ جَهَنَّمَ قَالُوا: وَاللَّهِ إِنْ كَانَتْ لَكَافِيَةً، يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ: «فَإِنَّهَا فُضَّلَتْ عَلَيْهَا بِتِسْعَةٍ وَسِتِّينَ جُزْءًا، كُلُّهَا مِثْلُ حَرِّهَا
तुम लोग जिस आग को जलाते हो वह जहन्नम की आग का 70वां हिस्सा है। सहाबियों ने कहा: “यह आग ही अज़ाब के लिए काफी थी, यह सुनकर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ्रमायाः वह आग 69 गुना ज्यादा है और हर गुना उसी दुनियावी आग की तरह गर्म है। [सही बुखारी 3265, सही मुस्लिम 2843]

जहन्नम (नरक) के सात खण्ड हैं। हर खण्ड में पहले की तुलना में ज़्यादा कठोर अज़ाब दिया जाता है। और प्रत्येक खण्ड में अपने कर्मों के अनुसार कुछ लोग होंगे। सबसे निचले खण्ड में जहां का अजाब सबसे ज्यादा सख्त होगा, मुनाफिकीन होंगे।
काफिरों को अजाब दिये जाने का सिलसिला हमेशा-हमेशा चलता रहेगा। वह कभी खत्म नहीं होगा। जब जब वे जल कर राख हो जायेंगे, तो उन्हें और अज़ाब दिये जाने के लिए पहली अवस्था में लौटा दिया जायेगा। अल्लाह तआला फरमाता है:

كُلَّمَا نَضِجَتْ جُلُودُهُمْ بَدَّلْنَاهُمْ جُلُودًا غَيْرَهَا لِيَذُوقُوا العَذَابَ [النساء : ٥٦]

यानी, “जब उनकी खालें पक जायेंगी हम उनके सिवा और खालें बदल देंगे ताकि वे अज़ाब चखते रहें। [सूरह अल निसा आयत 56]

एक दूसरी जगह फरमाया गया है:

وَالَّذِينَ كَفَرُوا هُمْ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقْضَى عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمْ مِنْ عَذَابِهَا كَذَلِكَ نَجْزِي كُلَّ كَفُورٍ ﴾ [فاطر: ٣٦]
यानी, “और जो लोग काफिर हैं उनके लिए दोजख की आग है, न तो उनको मौत ही आयेगी कि मर ही जाएं और न दोजख का अजाब ही हलका किया जायेगा। हम हर काफिर को ऐसी ही सज़ा देते हैं। [सूरह अल फातिर आयत 36]

जहन्नम में काफिरों को बेडियों में जकड दिया जायेगा और उनकी गर्दनों में तौक डाल दिये जायेंगे।
अल्लाह तआला फरमाता है:

وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ (59) سَرَابِيلُهُمْ مِنْ قَطِرَانٍ وَتَغْشَى وُجُوهَهُمُ النَّارُ (٦١ إبراهيم
यानी, “आप उस दिन गुनहगारों को देखेंगे कि जंजीरों में मिले जुले एक जगह जकड़े हुए होंगे। उनके लिबास गंधक के होंगे और आग उनके चेहरों पर भी चढ़ी हुई होगी। [सूरह इबराहीम आयत 49-50]

जहन्नमी थूहड़ का फल खायेंगे। अल्लाह तआला फरमाता है:

إِنَّ شَجَرَةَ الزَّقُومِ (٥٤) طَعَامُ الأَثِيمِ (٥٥) كَالْمُهْلِ يَغْلِي فِي البُطُونِ (٥٦) كَغَلْي الحَمِيمِ (٥٧) خُذُوهُ فَاعْتِلُوهُ إِلَى سَوَاءِ الْجَحِيمِ (٥٨) ثُمَّ صُبُّوا فَوْقَ رَأْسِهِ مِنْ عَذَابِ الْحَمِيمِ (٥٩ الدخان
यानी, “निस्सन्देह थूहड़ का पेड़ गुनाह करने वालों का खाना है, जो तिलछट के हैं और पेट में खौलता रहता है, तेज गर्म पानी के समान। [सूरह अल दुखान आयत 46]

जहन्नुम के अज़ाब की सख्ती और जन्नत की नेमतों का अन्दाजा सही मुस्लिम की उस हदीस से लगाया जा सकता है। जिस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है:

يُؤْتَى بِأَنْعَمِ أَهْلِ الدُّنْيَا مِنْ أَهْلِ النَّارِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ، فَيُصْبَغُ فِي النَّارِ صَبْغَةً، ثُمَّ يُقَالُ : يَا ابْنَ آدَمَ هَلْ رَأَيْتَ خَيْرًا قَطُّ ؟ هَلْ مَرَّ بِكَ نَعِيمٌ قَطُّ؟ فَيَقُولُ: لَا ، وَاللَّهُ يَا رَبِّ وَيُؤْتَى بِأَشَدَّ النَّاسِ بُوسًا فِي الدُّنْيَا، مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ، فَيُصْبَغُ صَبْغَةً فِي الجنَّةِ، فَيُقَالُ لَهُ : يَا ابْنَ آدَمَ هَلْ رَأَيْتَ بُؤْسًا قَطُّ ؟ هَلْ مَرَّ بِكَ شِدَّةٌ قَطُّ؟ فَيَقُولُ: لَا ، وَالله يَا رَبِّ مَا مَرَّ بِي بُؤْسٌ قَطُّ، وَلَا رَأَيْتُ شِدَّةً قَطُّ
क़ियामत के दिन दुनिया के सबसे ऐश व आराम में रहे जहन्नमी इंसान को लाया जायेगा और उसे जहन्नम में डुबकी लगवायी जायेगी और उससे पुछा जायेगा, ऐ आदम की औलाद ! क्या तुम्हें कभी सुख-चैन नसीब हुआ? क्या तुम्हें कभी नेमत हासिल हुई? वह कहेगा, नहीं, अल्लाह की कसम ! मेरे पालनहार, नहीं।
उसके बाद दुनिया के सबसे मुहताज जन्नती को लाया जायेगा, उसे जन्नत में कुछ देर के लिए भेजा जायेगा और उससे पुछा जायेगा, क्या तुम्हें कभी मुहताजी लाहीक हुई थी? क्या तुम कभी सख्त हालात से दोचार हुए थे?
वह कहेगा, नहीं, मेरे परवरदिगार, अल्लाह की कसम ! न तो मुझे कभी मुहताजी लाहीक हुई और न ही मुझ पर कभी सख्त हालात आए।

काफिर इंसान जहन्नम की एक डुबकी ही से दुनियावी नेमतों और ऐश व आराम को भूल जायेगा और मोमिन इंसान जन्नत में एक पल बिताने के बाद दुनियावी मुसीबतों और सख्त हालात को भूल जायेगा।

जन्नत और उसकी नेमतें

जन्नत हमेशा रहने और मान-सम्मान की जगह है। अल्लाह तआला ने उसे अपने नेक बन्दों के लिए तैयार किया है। उसमें ऐसी नेमतें हैं जिन्हें न आंखों ने देखा है, न कानों ने सुना है और न ही किसी इंसान के दिल में उनका ख्याल ही आया है। अल्लाह तआला फरमाता है:

فَلَا تَعْلَمُ نَفْسٌ مَا أُخْفِيَ هُمْ مِنْ قُرَّةِ أَعْيُنٍ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ﴾ [السجدة: ١٧]
यानी, “कोई नफ्स नहीं जानता जो हमने उनकी आँखों की ठंडक उनके लिए छुपा कर रख छोड़ी है। जो कुछ करते थे, यह उसका बदला है। [सूरह अल सजदा आयत 17]

जन्नत के विभिन्न दर्जे और मरतबे हैं। उसमें मोमिनों के ठिकाने उनके आमाल के अनुसार होंगे। अल्लाह तआला फरमाता हैः

يَرْفَعِ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنْكُمْ وَالَّذِينَ أُوتُوا العِلْمَ دَرَجَاتٍ [المجادلة: ١١]
यानी, “अल्लाह तआला तुम में से उन लोगों को जो ईमान लाये हैं, और जो इल्म दिये हैं, दर्जे बुलन्द कर देगा  (सूरह अल मुजादिला आयत 11)

जन्नती लोग जन्नत में जो चाहेंगे खायेंगे, पीएंगे, उनमें पानी की नहरें हैं जो पुरानी होने की वजह से बदबूदार नहीं होती हैं। और दूध की नहरें हैं जिनका मज़ा नहीं बदलता है। साफ शफ्फाफ शहद की नहरें होंगी और शराब की भी नहरें होंगी जिससे पीने वालों को सुरूर हासिल होगा। अलबत्ता उनकी शराब दुनियावी शराब जैसी नहीं होगी। अल्लाह तआला फरमाता है:

يُطَافُ عَلَيْهِمْ بِكَأْسٍ مِنْ مَعِينٍ (٥٦) بَيْضَاءَ لَذَّةٍ لِلشَّارِبِينَ (٥٧) لَا فِيهَا غَوْلٌ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنْزَفُونَ (٥٨ الصَّفاتِ
यानी, “जारी शराब के जाम का उन पर दौर चल रहा होगा, जो साफ शफ्फाफ और पीने में मजेदार होगा। न उससे सिर में दर्द होगा न उसके पीने से बहकेंगे। [सूरह अस साफ्फात आयत 45-47]

जन्नती जन्नत में हूरे ईन से शादी करेंगे। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया हैः

وَلَوْ أَنَّ امْرَأَةَ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ اطَّلَعَتْ إِلَى أَهْلِ الْأَرْضِ لَأَضَاءَتْ مَا بَيْنَهُمَا، وَلَمَلَاتُهُ رِيحًا، وَلَنَصِيفُهَا عَلَى رَأْسِهَا خَيْرٌ مِنَ الدُّنْيَا وَمَا فِيهَا
“यदि जन्नत की कोई महिला जमीन वालों की ओर झांक ले, तो आसमान और जमीन के बीच खाली जगहों को रौशन कर दे और उसे खुशबू से भर दे। [सही बुखारी 2796]

जन्नतियों के लिए सबसे बड़ी नेमत अल्लाह का दीदार होगा। जन्नतियों को पेशाब-पाखाना की जरूरत नहीं होगी। वे न खेखारेंगे, न थूकेंगे। उनकी कंघिया सोने की होंगी और उनका पसीना मुश्क होगा। उन्हें मिलने वाली नेमतें स्थायी होंगी, कभी समाप्त नहीं होंगी और न ही कम होंगी। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया :

مَنْ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ يَنْعَمُ لَا يَبْأَسُ، لَا تَبْلَى ثِيَابُهُ وَلَا يَفْنَى شَبَابُهُ
जन्नत में जो कोई दाखिल होगा, वह ऐश करेगा, मुहताजी से दो-चार नहीं होगा, न उसके कपड़े पुराने होंगे और न उसकी जवानी खत्म होगी। [सही मुस्लिम 2836]

सबसे कमतर जन्नती, ईमान वालों में से जो सबसे बाद में जहन्नम से निकलेगा और जन्नत में दाखिल होगा, उसके हिस्से में आने वाली नेमतें पूरी दुनिया की नेमतों से दस गुना ज्यादा बेहतर होंगी।

والحمد لله الذي بنعمته تتم الصالحات

स्रोत: जमीयत दावा वल इर्शाद, रियाद की किताब “आख़िरत का दिन”

0
Akhirah , Akhirat , Day of Account , Day of Judgement , islam , Last Hour , Qiyamah , Qiyamat
  • Facebook
  • Twitter
  • Tumblr
  • Pinterest
  • WhatsApp
  • Email
Share
learnislam
learnislam

About learnislam

Related questions

  • औलाद की तर्बियत की अहमियत

  • आसान नेकियाँ (अच्छे कर्म)

  • ईद ए मिलाद की सहीह तारीख क्या है ?

  • रसूलुल्लाह (ﷺ) के बताये हुए बेशकीमती कलिमात-ये कलिमात हर तरह की बीमारी से, शैतानी वस्वसों व असरात से हिफाजत में मुफीद है।

  • सहाबा किराम की आलोचना और उनके बीच के मतभेद

  • शराब़ सब बुराईयों की जड़

  • मुहर्रम महीने की फज़ीलत

 Previous question

Next question 

Online Courses
Introduction to Basic Arabic

Introduction to Basic Arabic

1
36h
L
By learnislam In Arabic language
Enroll Course
Learn online Quran

Learn online Quran

0
L
By learnislam In Quran
₹1,999.00 Original price was: ₹1,999.00.₹799.00Current price is: ₹799.00.
0% Booked
Add to cart
Learn Urdu online

Learn Urdu online

6
36h
L
By learnislam In Urdu
Enroll Course

Questions Categories

  • English ( 0 Questions )

    • Belief ( 4 Questions )
    • FIQH ( 5 Questions )
    • Hadith ( 0 Questions )
    • Others ( 8 Questions )
  • हिन्दी ( 0 Questions )

    • अन्य ( 8 Questions )
    • कुरान ( 0 Questions )
    • मज़हबी तौर-तरीके ( 6 Questions )
    • यकीन ( 11 Questions )
    • हदीस ( 0 Questions )

Makkah Hijri Calendar

رمضان ١٧, ١٤٤٧
6 Mar 2026
Designed by Dakwah Studio
Istanbul / Turkey
FAJR 05:59
SUNRISE 07:31
DHUHR 13:15
ASR 16:27
MAGHRIB 19:00
ISHA 20:32

Qibla Finder

Mosque Locator

Place search pagination


Results

    Export to Excel

    Recent Articles

    • Rights of Non-Muslims In Islam

      Islam is a religion of mercy to all people, both Muslims and ...

      October 8, 2025

    Login

    Forget

    • Register

    Like Us On Facebook

    Facebook Pagelike Widget

    • Address :
    • Support :
    • info@learnislam.net

    Quick Links

    • Ask Question
    • Users
    • About Us
    • Contact Us

    Popular Questions

    • इमाम अबू हनीफा (रहिमहुल्लाह) का

                          ...

      June 2, 2023
    • ईद ए मिलाद की सहीह

      ईद ए मिलाद की सहीह तारीख क्या है ...

      September 4, 2025
    • What Is the Meaning of

      Question: What is the meaning of Tawhid and what are its categories? Answer: Praise be ...

      July 5, 2022

    Questions Categories

    • Belief ( 4 Questions )
    • English ( 0 Questions )
    • FIQH ( 5 Questions )
    • Others ( 8 Questions )
    • अन्य ( 8 Questions )
    • मज़हबी तौर-तरीके ( 6 Questions )
    • यकीन ( 11 Questions )
    • हिन्दी ( 0 Questions )
    2022 Learn Islam |
    Translate »